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समाज की मर्यादा पर सीधा प्रहार — हल्बा समाज ने डॉ. देवेंद्र माहला के विरुद्ध की कड़ी सामाजिक कार्यवाही

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज की एकता, परंपरा और संवैधानिक अधिकारों पर गंभीर खतरा उत्पन्न करने वाले कृत्यों के चलते 36 गढ़ केंद्रीय महासभा के पूर्व अध्यक्ष रहे डॉ. देवेंद्र माहला के विरुद्ध निर्णायक सामाजिक कार्यवाही की गई है। समाज के प्रबुद्धजनों और विभिन्न स्तरों के पदाधिकारियों ने एक स्वर में उनके आचरण को समाजहित के प्रतिकूल, तानाशाहीपूर्ण और विघटनकारी बताते हुए कठोर रुख अपनाया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, डॉ. माहला के खिलाफ समाज के वरिष्ठों द्वारा अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज राष्ट्रीय महासभा (भारत) को विस्तृत लिखित शिकायत सौंपी गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उन्होंने बिना किसी विधिवत कार्यकारिणी प्रस्ताव के समाज के प्रतिष्ठित लोगों को निलंबित करने जैसे अलोकतांत्रिक आदेश जारी किए, सर्व आदिवासी समाज के आयोजनों में भाग लेने से रोकने का प्रयास किया तथा अन्य प्रांतीय हल्बा समाजों के साथ वैवाहिक संबंधों पर अनुचित प्रतिबंध लगाने जैसे फैसले थोपे।इतना ही नहीं, अपने ही संगठन के पदाधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार, महिला पदाधिकारी द्वारा दिए गए आवेदन को अपमानजनक ढंग से फेंकना, मंच से उतरकर युवाओं पर हाथ उठाने को दौड़ना तथा समाज द्वारा जमा की गई राशि का स्पष्ट हिसाब न देना जैसे गंभीर आरोपों ने असंतोष को और गहरा किया। आर्थिक पारदर्शिता पर उठे सवालों ने समाज के विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई।इन आरोपों को लेकर कई बार महासभा के मंचों पर जांच की मांग उठी। महामंत्री, न्याय समिति सहित संबंधित इकाइयों को आवेदन दिए गए, परंतु निष्पक्ष सुनवाई के बजाय मुद्दों को भटकाने और हंगामे के जरिए दबाने के प्रयास होते रहे। यह रवैया समाज की उस परंपरा के खिलाफ है, जिसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13(3)(क) के अंतर्गत विधिक संरक्षण प्राप्त है। समाज का आरोप है कि परंपरागत रूढ़िगत व्यवस्थाओं को दरकिनार कर अंतरजातीय ढांचे को मनमाने ढंग से प्रभावित करने का प्रयास किया गया।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राजनांदगांव में आयोजित राष्ट्रीय महासभा की कार्यकारिणी बैठक में समाज ने पुनः लिखित प्रतिवेदन सौंपा। राष्ट्रीय महासभा (भारत) के अध्यक्ष मंतूराम पवार ने तत्काल संज्ञान लेते हुए सात सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। समिति के अध्यक्ष श्यामसिंह तारम के नेतृत्व में जांच प्रारंभ कर दी गई है।एक और अहम तथ्य सामने आया कि बालोद स्थित पंजीकृत हल्बा आदिवासी सामाजिक संगठन के अध्यक्ष पद पर रहते हुए डॉ. माहला ने असंवैधानिक रूप से संगठन का नाम बदलकर “36 गढ़ केंद्रीय महासभा” लिखना शुरू कर दिया, जिससे शासन-प्रशासन और अन्य समाजों में भ्रम की स्थिति बनी रही। साथ ही राष्ट्रीय महासभा के बारे में भ्रामक प्रचार फैलाने के आरोप भी लगे हैं, जबकि राष्ट्रीय महासभा वर्ष 1998 से विधिवत गठित होकर देशभर के हल्बा-हल्बी आदिवासी संगठनों का मार्गदर्शन कर रही है।राष्ट्रीय महासभा ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं तो कठोर सामाजिक कदमों के साथ-साथ आर्थिक अनियमितताओं के मामलों में कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। अंततः डॉ. देवेंद्र माहला, पिता रामजी माहला, के विरुद्ध उनके गृहग्राम कुसुमकसा सहित तीनों स्तर के सामाजिक संगठनों की संयुक्त बैठक में सामाजिक कार्यवाही निर्धारित किया गया। इसकी सूचना जिला अध्यक्ष बालोद, 36 गढ़ महासभा के महामंत्री तथा राष्ट्रीय महासभा के अध्यक्ष को आगे की कार्रवाई हेतु भेज दी गई है।यह निर्णय समाज के लिए स्पष्ट संदेश है कि अनुशासन, पारदर्शिता और सम्मान से समझौता करने वालों के लिए हल्बा समाज में कोई स्थान नहीं है।

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